कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 17 अप्रैल 2026 को जिला न्यायालय, बिलासपुर में “साइबर लॉ एवं डिजिटल साक्ष्य तथा न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न्यायालय परिसर में अधिवक्ता संघ, बिलासपुर के सहयोग से संपन्न हुआ, जिन्होंने कार्यक्रम के आयोजन एवं संचालन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में कार्यरत अधिवक्ताओं ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम की गरिमा माननीय अतिथियों की उपस्थिति से बढ़ी, जिनमें प्रमुख रूप से अधिवक्ता दौराम चंद्रवंशी (अध्यक्ष), अधिवक्ता रवि पांडेय (सचिव), अधिवक्ता पी. आर. श्रीवास (कोषाध्यक्ष), अधिवक्ता राकेश चौबे (लाइब्रेरी सचिव) शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में माननीय न्यायिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें अधिवक्ता शैलेश कुमार केतारप – प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश; अधिवक्ता लवकेश प्रताप – विशेष न्यायाधीश; अधिवक्ता वेंसेसलास टोप्पो – जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, II F.T.S.C. (POCSO); अधिवक्ता विजेंद्र सोनवानी – XI जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर; अधिवक्ता असलम खान – प्रथम सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बिलासपुर; अधिवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा – द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश, सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) न्यायालय; अधिवक्ता अनुप टिग्गा – चतुर्थ अतिरिक्त न्यायाधीश, सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) न्यायालय; अधिवक्ता मंजूषा टोप्पो – प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश, सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) न्यायालय; अधिवक्ता शंकर कश्यप – पंचम सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) एवं विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट; अधिवक्ता अंशुल मिंझ – चतुर्थ सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग), बिलासपुर; कु. रिया चक्रवर्ती – द्वितीय सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग), बिलासपुर; अधिवक्ता प्रणव वैद्य – पंचम सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग), बिलासपुर; अधिवक्ता हितेश कुमार वलेजा – सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग), बिलासपुर; अधिवक्ता ऋचि जैन – पंचम अतिरिक्त न्यायाधीश, सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) न्यायालय; अधिवक्ता गीतांजलि कश्यप – षष्ठम सिविल जज, बिलासपुर; तथा अधिवक्ता जागृति ध्रुव – दशम सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग), बिलासपुर शामिल रहे।
कार्यक्रम में अधिवक्ता रूपेश त्रिवेदी, राज्य एवं उच्च न्यायालय बार काउंसिल सदस्य की उपस्थिति भी रही, जिसने विधिक समुदाय के सशक्त संस्थागत समर्थन को दर्शाया।

कुलपति डॉ. आर. श्रीधर, कलिंगा विश्वविद्यालय ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों और न्यायपालिका को कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने आधुनिक कानूनी व्यवस्था में साइबर अपराध के प्रति जागरूकता और डिजिटल साक्ष्य की स्वीकार्यता के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित किया।
विशेषज्ञ सत्र का संचालन सुश्री एकता चंद्राकर, सहायक प्राध्यापक, विधि संकाय द्वारा किया गया। उन्होंने साइबर लॉ एवं डिजिटल साक्ष्य की ग्राह्यता विषय पर विस्तृत एवं जानकारीपूर्ण प्रस्तुति दी। उन्होंने महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों, हाल के न्यायिक निर्णयों तथा न्याय वितरण प्रणाली में डिजिटल साक्ष्य के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया। साथ ही, उन्होंने डिजिटल साक्ष्य से संबंधित कानूनी ढांचे, इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के संग्रहण एवं संरक्षण की प्रक्रिया, न्यायालयों में उनकी ग्राह्यता तथा इस क्षेत्र में हाल के विकासों पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम को न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्यों, जिनमें पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं सिविल न्यायाधीश शामिल थे, की उपस्थिति से और अधिक गरिमा प्राप्त हुई। यह न्यायपालिका के विकसित होते विधिक क्षेत्रों में निरंतर अधिगम एवं क्षमता निर्माण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
कलिंगा विश्वविद्यालय समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है, जो शैक्षणिक संस्थानों और न्यायपालिका के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देते हैं, जिससे विधिक शिक्षा और न्यायिक कार्यप्रणाली के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है। बार एवं बेंच के सदस्यों से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया से प्रेरित होकर, विश्वविद्यालय भविष्य में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिला न्यायालयों में इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है।
संगोष्ठी का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ तथा विश्वविद्यालय ने पेशेवर विकास को बढ़ावा देने और न्याय वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।







